🕉️ केदारनाथ में भगवान शिव कैसे विराजमान हुए?
मान्यता के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने युद्ध में हुए पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद लेना चाहते थे। भगवान शिव उनसे प्रत्यक्ष मिलना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने बैल (महिष/नंदी) का रूप धारण किया और हिमालय की ओर चले गए।
पांडवों को जब पता चला कि बैल के रूप में स्वयं भगवान शिव हैं, तो उन्होंने उनका पीछा किया। तभी भगवान शिव भूमि में समाने लगे। मान्यता है कि भीम ने बैल के पिछले भाग को पकड़ लिया, और भगवान शिव का वही पृष्ठभाग केदारनाथ में दिव्य शिला के रूप में प्रकट हुआ। इसी स्वरूप की आज केदारनाथ में भगवान शिव के रूप में पूजा की जाती है।
कथा के अनुसार भगवान शिव के अन्य अंग अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए—तुंगनाथ में भुजाएँ, रुद्रनाथ में मुख, मध्यमहेश्वर में नाभि/उदर और कल्पेश्वर में जटाएँ। इन पाँचों को मिलाकर पंच केदार कहा जाता है।
केदारनाथ भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक और भगवान शिव को समर्पित प्रमुख हिमालयी तीर्थ है।
जय बाबा केदारनाथ 🙏 हर हर महादेव 🔱
